- शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर बागी सांसदों पर एकतरफा फैसला न लेने की मांग की
- अरविंद Shiv Sena UBT सावंत और अनिल देसाई ने दलबदल विरोधी कानून और संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए बागी गुट की मान्यता पर सवाल उठाए
- संसद में शिवसेना की असली पहचान, व्हिप जारी करने का अधिकार और…
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने दावा किया है कि बागी सांसदों की ओर से उन्हें कोई पत्र नहीं दिया गया है। उद्धव गुट के नेताओं ने कहा कि स्पीकर के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि बागी धड़े के सांसदों ने अपनी अलग पहचान या व्हिप जारी करने के अधिकार को लेकर कोई औपचारिक अनुरोध किया हो। इस दावे ने लोकसभा में शिवसेना की वैधानिक स्थिति को लेकर चल रही राजनीतिक उलझन को और गहरा कर दिया है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने स्पीकर से मुलाकात के दौरान दलबदल विरोधी कानून और संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बागी गुट को पार्टी की असली पहचान का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक पार्टी के असली ढांचे और नेतृत्व पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक स्पीकर को किसी एक पक्ष को मान्यता देने से बचना चाहिए। सावंत ने कहा कि हमने स्पीकर को बताया कि बागी सांसदों के पास न तो पार्टी का चुनाव चिह्न है और न ही वैधानिक रूप से व्हिप जारी करने का अधिकार।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब पिछले साल शिवसेना में फूट पड़ी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने उद्धव ठाक
स्रोत: hindi.oneindia.com































