- मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध अपने तीसरे साल में भी जारी है और भारत की संतुलन नीति पर दबाव बढ़ता जा रहा है
- पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत रूस के खिलाफ प्रतिबंधों में शामिल हो, लेकिन भारत ने तटस्थ रुख बनाए रखा है
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया
- भारत का कहना है कि वह बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति चाहता है
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मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध अपने तीसरे साल में भी जारी है और भारत की संतुलन नीति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत रूस के खिलाफ प्रतिबंधों में शामिल हो, लेकिन भारत ने तटस्थ रुख बनाए रखा है।
भारत की स्थिति
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। भारत का कहना है कि वह बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति चाहता है।
तेल और गैस
रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात भारत के लिए फायदेमंद रहा है। यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों के बाद भारत दुनिया में रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
शांति प्रयास
पीएम मोदी ने दोनों देशों का दौरा किया और शांति के लिए भारत की भूमिका की पेशकश की। भारत को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में देखा जाता है।















