- मुंबई में इस मानसून सीजन में डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में तेज़ उछाल देखा गया है, जिसके बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने 17 जुलाई 2026 को शहरवासियों और यात्रियों के लिए एक सख्त स्वास्थ्य सलाह जारी की
- यह सिर्फ मुंबई की बात नहीं है — देशभर में मानसून के दौरान मच्छरजनित बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं, इसलिए यह खबर हर भारतीय परिवार के लिए महत्वपूर्ण है
- मुंबई में BMC की सख्त चेतावनी
- BMC के आंकड़ों के अनुसार, शहर में मलेरिया के मामले 3,115 से बढ़कर 3,681 हो गए हैं, जबकि डेंगू के मामले 734 से बढ़कर 938 तक पहुंच गए हैं
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मुंबई में इस मानसून सीजन में डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में तेज़ उछाल देखा गया है, जिसके बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने 17 जुलाई 2026 को शहरवासियों और यात्रियों के लिए एक सख्त स्वास्थ्य सलाह जारी की। यह सिर्फ मुंबई की बात नहीं है — देशभर में मानसून के दौरान मच्छरजनित बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं, इसलिए यह खबर हर भारतीय परिवार के लिए महत्वपूर्ण है।
मुंबई में BMC की सख्त चेतावनी
BMC के आंकड़ों के अनुसार, शहर में मलेरिया के मामले 3,115 से बढ़कर 3,681 हो गए हैं, जबकि डेंगू के मामले 734 से बढ़कर 938 तक पहुंच गए हैं। लेप्टोस्पायरोसिस के मामले भी 136 से बढ़कर 157 हो गए, और सबसे चिंताजनक बात यह रही कि स्वाइन फ्लू के मामले लगभग तीन गुना बढ़कर 113 तक जा पहुंचे।
इस बढ़ोतरी को रोकने के लिए महानगरपालिका ने कई कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:
- 3,000 से अधिक निर्माण स्थलों का निरीक्षण, जहां बारिश का पानी जमा होकर मच्छरों के प्रजनन का कारण बनता है
- लगभग 8 लाख घरों में मच्छरनाशक धूम्रीकरण (फॉगिंग) अभियान
- घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वेक्षण, जिसके दायरे में शहर के करोड़ों निवासी आते हैं
देशभर में डेंगू-मलेरिया का रुझान
पिछले तीन वर्षों के आंकड़े
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 2023 से 2025 के बीच देश में डेंगू के कुल 6,36,204 मामले और 877 मौतें दर्ज की गईं। वर्ष 2023 में 2,89,235 मामले और 485 मौतें हुईं, 2024 में यह घटकर 2,33,519 मामले और 297 मौतें रह गईं, और 2025 के अनंतिम (प्रोविजनल) आंकड़ों के अनुसार 1,13,450 मामले और 95 मौतें दर्ज हुईं।
सबसे प्रभावित राज्य
2025 में डेंगू से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों की सूची इस प्रकार रही:
- तमिलनाडु — 20,866 मामले
- उत्तर प्रदेश — 8,926 मामले
- तेलंगाना — 8,139 मामले
- राजस्थान — 4,300 से अधिक मामले
- गुजरात — 3,947 मामले
मलेरिया के मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर गिरावट का रुझान रहा है — 2018 में 4.30 लाख मामलों से घटकर 2022 में यह 1.74 लाख रह गए, यानी करीब 60 प्रतिशत की कमी। इसी अवधि में मलेरिया से होने वाली मौतें भी 96 से घटकर 64 रह गईं। हालांकि पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में मलेरिया का बोझ अब भी सबसे अधिक बना हुआ है।
गैर-संक्रामक रोगों की दोहरी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की मच्छरजनित बीमारियां तुरंत ध्यान खींचती हैं, लेकिन देश के सामने एक और बड़ी और लंबी चुनौती भी खड़ी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. तामोरिश कोले के अनुसार, मच्छरजनित बीमारियां तुरंत ध्यान आकर्षित करती हैं, लेकिन कहीं बड़ी चुनौती गैर-संक्रामक रोगों (NCD) की है। देश में फिलहाल 7.01 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप और 4.68 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित बताए गए हैं, और गैर-संक्रामक रोग देश में होने वाली कुल मौतों में करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी रखते हैं। यानी मानसून की मौसमी बीमारियों से निपटने के साथ-साथ दीर्घकालिक बीमारियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
मानसून में खुद को कैसे बचाएं
स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम नागरिकों के लिए कुछ जरूरी सावधानियां सुझाई हैं:
- घर के आसपास कहीं भी बारिश का पानी जमा न होने दें
- DEET या पिकारिडिन युक्त मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें
- जलभराव वाले इलाकों में वाटरप्रूफ जूते पहनें
- केवल उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं
- मानसून के दौरान सड़क किनारे मिलने वाले खाने से परहेज करें
- यदि तेज बुखार, बदन दर्द, गले में खराश या थकान 48 घंटे से ज्यादा बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, खुद से दवा न लें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुंबई में इस साल डेंगू और मलेरिया के मामले कितने बढ़े हैं?
BMC के अनुसार शहर में मलेरिया के मामले 3,115 से बढ़कर 3,681 और डेंगू के मामले 734 से बढ़कर 938 हो गए हैं। लेप्टोस्पायरोसिस और स्वाइन फ्लू के मामलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मानसून में डेंगू-मलेरिया से बचने के लिए सबसे जरूरी सावधानी क्या है?
घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें, क्योंकि यही मच्छरों के प्रजनन का सबसे बड़ा कारण है। इसके साथ मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल और पूरी बाजू के कपड़े पहनना भी मदद करता है।
क्या भारत में मलेरिया के मामले कम हो रहे हैं?
हां, राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार मलेरिया के मामले 2018 के 4.30 लाख से घटकर 2022 में 1.74 लाख रह गए, यानी करीब 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में यह अब भी एक चुनौती बना हुआ है।














