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अंतर्राष्ट्रीय

मनीला में जयशंकर-वांग यी मुलाकात: सीमा पर शांति बनी सामान्य रिश्तों की शर्त

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फिलीपींस की राजधानी मनीला में 22 जुलाई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई मुलाकात ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर हुई इस मुलाकात में जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के बीच सामान्य रिश्ते संभव नहीं हैं। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पिछले करीब दो साल से नई दिल्ली और बीजिंग धीरे-धीरे संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

मनीला में क्या हुई बातचीत

आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठकों के लिए मनीला पहुंचे जयशंकर और वांग यी की यह मुलाकात द्विपक्षीय एजेंडे पर केंद्रित रही। दोनों नेताओं ने सीमा प्रबंधन से लेकर व्यापार तक कई मुद्दों पर बातचीत की।

सीमा पर शांति को लेकर भारत का रुख

जयशंकर ने वांग यी से कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बना रहना सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक “पूर्व-शर्त” है। उन्होंने कहा कि स्थिर और सहयोगात्मक रिश्ता आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता की बुनियाद पर ही खड़ा हो सकता है। यह बयान दर्शाता है कि भारत सीमा मुद्दे को व्यापार या अन्य क्षेत्रों में सहयोग से अलग करने के बजाय उसे रिश्तों की नींव मानता रहेगा।

व्यापार असंतुलन पर भारत की चिंता

सीमा मुद्दे के अलावा जयशंकर ने आर्थिक मोर्चे पर भी भारत की चिंताएं सामने रखीं। उन्होंने चीनी बाजार तक निष्पक्ष पहुंच, बढ़ते व्यापार घाटे और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अनिश्चितता जैसे मुद्दे उठाए। भारत लंबे समय से चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने और चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की मांग करता रहा है, और यह मुद्दा एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत का हिस्सा बना।

2024 से जारी सामान्यीकरण की प्रक्रिया

यह मुलाकात अचानक नहीं हुई, बल्कि पिछले करीब दो साल से चल रही एक धीमी लेकिन लगातार प्रक्रिया की अगली कड़ी है। अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाओं की वापसी के बाद से रिश्तों में सुधार की गुंजाइश बनी है। उसी महीने रूस के कज़ान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी, जिसमें आगे के रास्ते की दिशा तय की गई। इसके बाद अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में भी दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत हो चुकी है।

इस दौरान दोनों देशों ने भरोसा बहाली के कई कदम उठाए हैं, जिन्हें जयशंकर ने मनीला में सराहा। इनमें प्रमुख हैं:

  • दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली
  • वीज़ा नियमों में ढील और आवेदन प्रक्रिया का सरलीकरण
  • कैलाश मानसरोवर यात्रा का दोबारा शुरू होना
  • सीमावर्ती इलाकों में सीमा व्यापार की बहाली

जयशंकर ने कहा कि अक्टूबर 2024 से दोनों पक्षों ने इस लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास किए हैं और रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं।

आगे की राह और भारत के लिए मायने

भारत और चीन के बीच 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य टकराव के बाद संबंध वर्षों तक तनावपूर्ण बने रहे। ऐसे में मनीला की यह बैठक दिखाती है कि दोनों पक्ष कूटनीतिक चैनलों को जीवंत रखना चाहते हैं, भले ही मूल सीमा विवाद अभी सुलझा न हो। भारत के लिए यह संतुलन साधना अहम है: एक तरफ पड़ोसी देश के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाना, तो दूसरी तरफ सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े सवालों पर समझौता न करना।

आने वाले महीनों में सीमा मामलों पर राजनयिक और सैन्य स्तर की और बैठकें होने की उम्मीद है, जिनमें भरोसा बहाली के मौजूदा कदमों को आगे बढ़ाया जा सकता है। भारतीय विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि जब तक सीमा पर स्थायी शांति सुनिश्चित नहीं होती, तब तक व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग सीमित दायरे में ही आगे बढ़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मनीला में जयशंकर और वांग यी की मुलाकात कब और कहां हुई?

यह मुलाकात 22 जुलाई 2026 को फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई। दोनों नेता आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठकों में शामिल होने के लिए मनीला पहुंचे थे।

जयशंकर ने बैठक में मुख्य रूप से किन मुद्दों पर बात की?

उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति को सामान्य संबंधों की पूर्व-शर्त बताया और साथ ही व्यापार घाटे, बाजार तक पहुंच और आपूर्ति शृंखला की अनिश्चितता जैसे आर्थिक मुद्दे भी उठाए।

भारत-चीन के बीच अभी तक कौन-कौन से भरोसा बहाली के कदम उठाए जा चुके हैं?

अक्टूबर 2024 के बाद से सीधी उड़ानें फिर शुरू हुई हैं, वीज़ा नियमों में ढील दी गई है, कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई है और सीमावर्ती व्यापार भी बहाल किया गया है।

यह खबर भारत संवाद संपादकीय ने तैयार की है। हमारी संपादकीय नीति · कोई गलती दिखी? हमें बताएँ

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