- text-align: justify
- अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने के लिए शांति समझौते को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तखत कर चुके हैं, लेकिन यह शांति समझौता <
- com/search?s=israel"
- और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए परेशानी का एक बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है
पढ़ने का समय: लगभग 1 मिनट
अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए हैं। हालांकि इस कदम को क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसने इजरायल और खासकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल में संसदीय चुनाव सिर पर हैं, और नेतन्याहू की राजनीतिक नाव पहले से ही उथले पानी में चल रही है।
इजरायल के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि अमेरिका-ईरान समझौते का लेबनान और हिजबुल्लाह पर क्या असर पड़ेगा। इजरायल को आशंका है कि इस समझौते से ईरान को आर्थिक राहत मिलेगी, जिसका एक बड़ा हिस्सा वह लेबनान में अपने प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह को मजबूत करने में खर्च कर सकता है। हिजबुल्लाह के पास पहले से ही इजरायल की सीमा पर हजारों रॉकेट तैनात हैं, और किसी भी नए समझौते को इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान एक सीधा खतरा मानता है। नेतन्याहू के लिए यह एक कूटनीतिक और सुरक्षा दोनों ही मोर्चों पर बड़ी चुनौती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता नेतन्याहू के लिए एक दोधारी तलवार साबित हो सकता है। एक तरफ वह अपने कट्टर समर्थकों को यह दिखा सक
स्रोत: abplive.com















