- अमर उजाला संवाद के 'सतत विकास की नई राह' सत्र में राज्य की ऊर्जा नीतियों और रिन्यूएबल इकॉनमी पर होगी अहम चर्चा
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अमर उजाला संवाद के तहत आयोजित ‘सतत विकास की नई राह’ सत्र में देश के अग्रणी ऊर्जा विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एक साझा मास्टरप्लान पेश किया, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले एक दशक में सौर, पवन और जैव-ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए निवेश से न केवल बिजली उत्पादन की लागत घटेगी, बल्कि लाखों नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। सत्र में यह रेखांकित किया गया कि राज्य सरकारों की ऊर्जा नीतियों में पारदर्शिता और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस परिवर्तन की गति तय करेगी।
चर्चा में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में देश की कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसे और विस्तार देने के लिए ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और ऊर्जा भंडारण की तकनीकों को विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य स्तर पर नीतियों में एकरूपता लाई जाए और निवेशकों को स्थिरता का भरोसा दिया जाए, तो भारत 2030 तक अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पार कर सकता है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश का व्यापार घाटा सुधरेगा।
इस अवसर पर उद्योग जगत के प्रतिनिधिय
स्रोत: amarujala.com













