- तमिलनाडु की नई सरकार ने मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर सिकंदर बादुशा दरगाह के पास ‘कार्तिगै दीपम’ जलाने की अनुमति देने वाली मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि यह पहाड़ी 'प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम' के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है
- पहाड़ी पर मौजूद नाजुक चट्टानी गुफाओं को…
पढ़ने का समय: लगभग 1 मिनट
तमिलनाडु सरकार ने मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की अनुमति देने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार का कहना है कि यह पहाड़ी ‘प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम’ के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है, और यहां किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति देना कानून के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने हाल ही में एक आदेश में ‘कार्तिगै दीपम’ के अवसर पर पहाड़ी पर दीप जलाने की अनुमति दी थी। यह दीप सिकंदर बादुशा दरगाह के पास जलाया जाना था। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि पहाड़ी पर मौजूद नाजुक चट्टानी गुफाओं को इस तरह के आयोजनों से नुकसान पहुंच सकता है।
तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां जैन और बौद्ध धर्म से जुड़ी प्राचीन गुफाएं और शिलालेख मौजूद हैं, जो दो हजार साल से भी अधिक पुराने माने जाते हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह स्थल राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है और यहां किसी भी तरह की धार्मिक या सांस्कृतिक गतिविधि से इन प्राचीन संरचनाओं को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
इस माम
स्रोत: thewirehindi.com































