- Burnt Body Postmortem: जले हुए शवों का कैसे किया जाता है पोस्टमार्टम? जानिए अस्त व्यस्त बॉडी में क्या और कैसे देख पाते हैं डॉक्टर
पढ़ने का समय: लगभग 1 मिनट
जले हुए शवों का पोस्टमार्टम करना फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए एक अत्यंत जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया होती है। जब शरीर आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस जाता है, तो उसकी पहचान करना और मौत का कारण पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। डॉक्टरों के सामने एक ऐसा शव होता है जो अक्सर पहचान से परे होता है, जिसमें मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, हड्डियां उजागर हो जाती हैं और शरीर की मुद्रा भी बदल जाती है, जिसे ‘पगिलिस्टिक पोज’ कहा जाता है।
ऐसे मामलों में फोरेंसिक विशेषज्ञ सबसे पहले शव की बाहरी जांच करते हैं। वे जलने की गहराई, शरीर पर पड़े निशान, और किसी भी प्रकार की चोट के निशान को ध्यान से देखते हैं। इसके बाद आंतरिक जांच की जाती है, जिसमें फेफड़ों और श्वास नली की जांच सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि मृतक ने आग लगने के दौरान सांस ली थी, तो उसके फेफड़ों में कालिख और धुंआ पाया जाता है, जो यह साबित करता है कि वह आग लगने के समय जीवित था। इसके विपरीत, यदि फेफड़े साफ हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि मौत आग लगने से पहले ही हो गई थी।
इस प्रक्रिया में रक्त और ऊतकों के नमूने भी लिए जाते हैं, जिन्हें प्रयोगशाला में भेजा जाता है। ये नमूने यह पता लगाने में मदद करते हैं कि शरीर में कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं
स्रोत: abplive.com































