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नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी को सबसे फलदायी और कठिन व्रतों में गिना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष यह व्रत कब पड़ रहा है, इसकी जानकारी सामने आ गई है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, निर्जला एकादशी पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु बिना जल और अन्न ग्रहण किए पूरे दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे ‘पांडव एकादशी’ या ‘भीमसेन एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। कथा के अनुसार, भीमसेन इस व्रत की कठिनाई के कारण साल भर की अन्य एकादशियों का पालन नहीं कर पाते थे, तब ऋषियों ने उन्हें इस एक व्रत को करने का सुझाव दिया था।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ और समाप्ति समय तय हो चुका है। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद किया जाता है। इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत जून माह के अंतिम सप्ताह में पड़ने की संभावना है। हालांकि, सही तिथि और सम
स्रोत: abplive.com















