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- सनातन धर्म में पीपल के पेड़ को केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा और देवी-देवताओं का प्रतीक माना गया है
- धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पीपल का वृक्ष बेहद पवित्र माना जाता है
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सनातन धर्म में पीपल के पेड़ को केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि देवताओं का निवास स्थान और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वृक्ष अत्यंत पवित्र है और सदियों से लोग विशेष रूप से शनिवार के दिन इसकी पूजा करते आ रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि पीपल की नियमित पूजा और देखभाल करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में आने वाली आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और धन की कमी नहीं होती।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है और इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना, दीपक जलाना और परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दुष्प्रभाव कम होते हैं और व्यक्ति को आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है, और शनिवार को इसकी पूजा करने से दोनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पीपल की पूजा के साथ-साथ इसकी जड़ में जल अर्पित करना और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी होता है। इस उपाय को करने से न केवल धन की कमी दूर होती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है। धार्मिक ग्रंथों में पीपल को देववृक्ष कहा गया है और
स्रोत: abplive.com















